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Author Topic: Mini story  (Read 1117 times)

Offline Sarbjeet S Tinku

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Mini story
« on: July 07, 2016, 10:34:12 AM »
एक बार एक उदास बंदर मरने को गया तो जाते-जाते उसने सोते
हुए शेर के कान खींच लिये।


शेर उठा और गुस्से से दहाड़ा, "किसने किया ये?
किसने
अपनी मौत बुलायी है?"

बंदर: मैं हूँ महाराज।

शेर ने पूछा, "ये करते हुए तुम्हें किसी ने देखा?"

बंदर: नहीं महाराज।

शेर: ठीक है, एक बार और करो अच्छा लगता है।


कहानी का सार: अकेले रह-रह कर जंगल का
राजा भी बोर हो जाता है।
इसलिए अपने दोस्तों के संपर्क में रहे

😊😊😊

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Re: Mini story
« Reply #1 on: July 07, 2016, 10:49:36 AM »
एक राजा को घने जंगल में प्यास लगी, तभी उसकी नजर एक वृक्ष पर पड़ी, जहाँ एक डाली से टप-टप करती पानी की बूंदें गिर रहीं थी ! राजा ने उस वृक्ष के पत्ते से दोना बनाया और  काफी समय बाद जब दोना भर गया तो जैसे ही पीना चाहा, तभी सामने बैठा एक तोता आया और उस दोने को झपट्टा मारकर वापस बैठ गया, दोने का पूरा पानी गिर गया !

काफी प्रयास के बाद राजा ने दूसरा दोना भरा और पीना चाहा तो तोता फिर आया और दोने को गिरा के वापिस बैठ गया ! राजा क्रोधित हो उठा - "मुझे जोर से प्यास लगी है और यह दुष्ट पक्षी सारा जल गिरा देता है ! अब की बार आएगा तो इसे मार दूँगा ! दोने मे फिर बूंद बूंद जल भरा और पीने के लिए जैसे ही उस दोने को ऊँचा किया तोते ने दोने को झपट्टा मार गिरा दिया , पर राजा ने अपने चाबुक से तोते को मारा और तोते के प्राण पखेरु उड़ गए !

तोते से पीछा छूटा, बूंद-बूंद से कब तक दोना भरुँ जहा से ये पानी टपक रहा है, क्यों ना वहीं जाकर झट से पानी भर लू ऐसा सोचकर राजा उस डाली के पास पहुँचा, जहाँ से पानी टपक रहा था ! देखा तो पाँव के नीचे जमीन खिसक गयी !
क्योंकि डाल पर एक भयंकर अजगर सोया हुआ था ! राजा जिसको पानी समझ रहा था, वह अजगर की ज़हरीली लार थी ! हे प्रभु मैंने यह क्या कर दिया ? जिसने प्राण बचाये उसे ही मार डाला ! काश ! मैंने सन्तों के बताये 'क्षमा मार्ग को धारण किया होता !

क्रोध में व्यक्ति दुसरों के साथ-साथ खुद का भी नुकसान करता है ! क्रोध की उत्पत्ति अज्ञानता से होती है और अन्त पाश्चाताप से होता है !
🙏🏻😊

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Re: Mini story
« Reply #2 on: July 07, 2016, 12:10:21 PM »
*आज एक नई सीख़ मिली*
 जब अँगूर खरीदने बाजार गया ।
पूछा *"क्या भाव है?*
बोला : *"80 रूपये किलो ।"*
पास ही कुछ अलग-अलग टूटे हुए अंगूरों के दाने पडे थे ।
मैंने पूछा: *"क्या भाव है" इनका ?"*
वो बोला : *"30 रूपये किलो"*
मैंने पूछा : "इतना कम दाम क्यों..?
वो बोला : "साहब, हैं तो ये भी बहुत बढीया..!!
लेकिन ... *अपने गुच्छे से टूट गए हैं ।"*
मैं समझ गया कि अपने... *संगठन...समाज* और *परिवार*से अलग होने पर हमारी कीमत......आधे से भी कम रह जाती है।

कृपया अपने *परिवार* एवम् *मित्रो*से हमेशा जुड़े रहे।           🙏

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Re: Mini story
« Reply #3 on: July 13, 2016, 10:22:11 AM »
चूल्हे-चौके में व्यस्त
 और पाठशाला से दूर रही माँ
 नहीं बता सकती
 कि ”नौ-बाई-चार” की कितनी ईंटें लगेंगी
 दस फीट ऊँची दीवार में
 लेकिन अच्छी तरह जानती है
 कि कब, कितना प्यार ज़रूरी है
 एक हँसते-खेलते परिवार में।

त्रिभुज का क्षेत्रफल
 और घन का घनत्व निकालना
 उसके शब्दों में ‘स्यापा’ है
 क्योंकि उसने मेरी छाती को
 ऊनी धागे के फन्दों
 और सिलाइयों की
 मोटाई से नापा है

मुद्दतों से खाना बनाती आई माँ ने
 कभी पदार्थों का तापमान नहीं मापा
 तरकारी के लिए सब्ज़ियाँ नहीं तौलीं
 और नाप-तौल कर ईंधन नहीं झोंका
 चूल्हे या सिगड़ी में
 उसने तो केवल ख़ुश्बू सूंघकर बता दिया है
 कि कितनी क़सर बाकी है
 बाजरे की खिचड़ी में।

घर की कुल आमदनी के हिसाब से
 उसने हर महीने राशन की लिस्ट बनाई है
 ख़र्च और बचत के अनुपात निकाले हैं
 रसोईघर के डिब्बों
 घर की आमदनी
 और पन्सारी की रेट-लिस्ट में
 हमेशा सामन्जस्य बैठाया है
 लेकिन अर्थशास्त्र का एक भी सिद्धान्त
 कभी उसकी समझ में नहीं आया है।

वह नहीं जानती
 सुर-ताल का संगम
 कर्कश, मृदु और पंचम
 सरगम के सात स्वर
 स्थाई और अन्तरे का अन्तर
 स्वर साधना के लिए
 वह संगीत का कोई शास्त्री भी नहीं बुलाती थी
 लेकिन फिर भी मुझे
 उसकी लल्ला-लल्ला लोरी सुनकर
 बड़ी मीठी नींद आती थी।

नहीं मालूम उसे
 कि भारत पर कब, किसने आक्रमण किया
 और कैसे ज़ुल्म ढाए थे
 आर्य, मुग़ल और मंगोल कौन थे,
कहाँ से आए थे?
उसने नहीं जाना
 कि कौन-सी जाति
 भारत में अपने साथ क्या लाई थी
 लेकिन हमेशा याद रखती है
 कि नागपुर वाली बुआ
 हमारे यहाँ कितना ख़र्चा करके आई थी।

वह कभी नहीं समझ पाई
 कि चुनाव में किस पार्टी के निशान पर
 मुहर लगानी है
 लेकिन इसका निर्णय हमेशा वही करती है
 कि कौनसी वाली दीदी के यहाँ
 दीपावली पर कौन-सी साड़ी जानी है।

मेरी अनपढ़ माँ
 वास्तव में अनपढ़ नहीं है
 वह बातचीत के दौरान
 पिताजी का चेहरा पढ़ लेती है
 काल-पात्र-स्थान के अनुरूप
 बात की दिशा मोड़ सकती है
 झगड़े की सम्भावनाओं को भाँप कर
 कोई भी बात
 ख़ूबसूरत मोड़ पर लाकर छोड़ सकती है

दर्द होने पर
 हल्दी के साथ दूध पिला
 पूरे देह का पीड़ा को मार देती है
 और नज़र लगने पर
 सरसों के तेल में रूई की बाती भिगो
 नज़र भी उतार देती है
 अगरबत्ती की ख़ुश्बू से
 सुबह-शाम सारा घर महकाती है
 बिना काम किए भी
 परिवार तो रात को
 थक कर सो जाता है
 लेकिन वो सारा दिन काम करके भी
 परिवार की चिन्ता में
 रात भर सो नहीं पाती है।

सच!
कोई भी माँ
 अनपढ़ नहीं होती
 सयानी होती है
 क्योंकि ढेर सारी डिग्रियाँ बटोरने के बावजूद
 बेटियों को उसी से सीखना पड़ता है
 कि गृहस्थी
 कैसे चलानी होती है।

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Re: Mini story
« Reply #4 on: July 13, 2016, 10:23:47 AM »
सच ये नहीं कि दुनिया में सभी लोग बदल ही जाते हैं,

कुछ मजबूरन भी हालात के सांचों में ढल जाते हैं......

सभी एक समान तो नहीं होते जमाने में
कुछ न भी बदलें तो भी हम गलत फहमी पाल लेते हैं ।

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Re: Mini story
« Reply #5 on: July 16, 2016, 04:52:28 PM »
ਪਤਨੀ ਨੇ Marriage ਦੇ ਕੁਝ ਸਾਲ ਬਾਅਦ ਸੋਚਿਆ…… #ਕੇ ਅਗਰ ਉਹ ਆਪਣੇ ਪਤੀ ਨੂੰ ਛੱਡ ਕੇ #ਚਲੀ ਜਾਵੇ…… #ਤਾਂ ਉਹ ਕਿਦਾਂ ਦਾ ਮਹਿਸੂਸ ਕਰੂਗਾ……??.ਉਸ ਨੇ ੲਿਕ #ਕਾਗਜ ਤੇ ਲਿਖਿਆ…… #ਮੈਂ ਤੇਰੇ ਤੋਂ ਦੁਖੀ ਹੋ ਗੲੀ ,ਹੁਣ ਤੇਰੇ ਨਾਲ ਨਹੀ ਰਿਹ ਸਕਦੀ ਤੇ……#ਹਮੇਸਾ ਲਈ ਘਰ ਛੱਡ ਕੇ ਜਾ ਰਹੀ ਹਾਂ……!!.ਪਤੀ ਦਾ #Impression ਦੇਖਣ ਲੲੀ ਕਾਗਜ ਟੇਬਲ ਤੇ ਰੱਖ ਕੇ ਬੈਡ #ਥੱਲੇ ਲੁਕ ਗੲੀ……!!.ਪਤੀ ਕੰਮ ਤੋਂ ਆੲਿਆ…… #ਤੇ ਕਾਗਜ ਪੜ ਕੇ ਥੋੜੀ ਦੇਰ ਚੁੱਪ ਹੋ ਗਿਆ…… #ਤੇ ਕਾਗਜ ਤੇ ਕੁਝ ਲਿੱਖਿਆ ,ਫਿਰ ਗੀਤ ਗਾ ਕੇ ਭੰਗੜਾ #ਪਾਉਣ ਲੱਗਿਆ……!!.ਫਿਰ ਕੱਪੜੇ ਬਦਲ ਕੇ ਕਿਸੀ ਨੂੰ #Phone ਕੀਤਾ…… #ਤੇ ਕਹਿੰਦਾ ਅੱਜ ਮੈਂ ਆਜਾਦ ਹੋ ਗਿਆ…… #ਤੇ ਕਿਹਾ ਮੇਰੀ ਪਾਗਲ ਪਤਨੀ ਮੈਨੂੰ ਹਮੇਸਾ ਲੲੀ ਛੱਡ ਕੇ ਚਲੀ ਗਈ ਤੇ #ਮੈਂ ਤੈਨੂੰ ਮਿਲਣ ਆ ਰਿਹਾ…… #ਤੇਰੇ ਘਰ ਦੇ ਸਾਹਮਣੇ ਪਾਰਕ ਚ……!!.ਪਤੀ ਬਾਹਰ ਗਿਆ…… #ਹੰਝੂਆਂ ਨਾਲ ਭਰੀਆਂ ਅੱਖਾਂ ਲੈ ਕੇ ਪਤਨੀ ਨੇ ਬੈਡ ਦੇ ਨਿੱਚੇ ਤੋਂ ਨਿੱਕਲ ਕੇ ਕੰਬਦੇ ਹੱਥਾਂ #ਨਾਲ ਕਾਗਜ ਪੜਿਆ……!!.ਕਾਗਜ ਚ ਲਿੱਖਿਆ ਸੀ……… #ਪਾਗਲ ਬੈਡ ਦੇ ਨਿੱਚੇ ਤੇਰੇ ਪੈਰ ਦਿਖ ਰਹੇ ਸੀ…… #ਮੈਂ ਪਾਰਕ ਕੋਲ ਦੁਕਾਨ ਤੋਂ ਬਰੈਡ ਲੈ ਕਾ ਆ ਰਿਹਾ…… #ਤਦ ਤੱਕ ਚਾਹ ਬਣਾ ਕੇ ਰੱਖੀਂ……!!.ਮੇਰੀ #ਜਿੰਦਗੀ ਚ ਖੁਸੀਆਂ ਤੇਰੇ ਬਹਾਨੇ ਨਾਲ ਨੇ……#ਅੱਧੀਆਂ ਤੈਨੂੰ ਸਤਾਉਣ ਨਾਲ ਤੇ…… #ਅੱਧੀਆਂ ਤੈਨੂੰ ਮਨਾਉਣ ਨਾਲ……!!😂😂😂😂😂😂😂

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Re: Mini story
« Reply #6 on: July 16, 2016, 08:08:43 PM »
फेसबुक पर एक फोटो पोस्ट हुई
पति पत्नी और बेटा बेटी
लिखा “मे और मेरी प्यारी सी फैमेली”

बेटे ने पापा के हाथ से मोबाइल लिया फोटो देखा
और पूछा पापा दादा दादी कँहा है?
पापा बोला बेटा ये अपनी फैमेली है..
दादा दादी कहाँ से आएंगे

बेटा मतलब जब मेरी भी शादी हो
जायेगी तो आप मेरी फैमेली मेंबर नहीं रहोगे
पिता को साप सूंघ गया

बेटा बोला पापा फिर तो में शादी ही नहीं करूँगा
मुझे आप और मम्मी चाहिए फेमिली में
पिता को अपनी गलती का अहसास हुआ आँखों में आँसू थे

बच्चे वहीँ सीखते हे जो हम सिखाते है…

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Re: Mini story
« Reply #7 on: August 23, 2016, 10:15:09 AM »
एक बार समुद्री तूफ़ान के बाद हजारों लाखों
मछलियाँ किनारे पर रेत पर तड़प तड़प कर मर
रहीँ थीं ! इस भयानक स्थिति को देखकर
पास में रहने वाले एक 6 वर्ष के बच्चे से रहा
नहीं गया, और वह एक एक मछली उठा कर
समुद्र में वापस फेकनें लगा ! यह देख कर
उसकी माँ बोली, बेटा लाखों की संख्या में
है , तू कितनों की जान बचाएगा ,यह सुनकर
बच्चे ने अपनी स्पीड और बढ़ा दी, माँ फिर
बोली बेटा रहनें दे कोई फ़र्क नहीं पड़ता !
बच्चा जोर जोर से रोने लगा और एक मछली
को समुद्र में फेकतें हुए जोर से बोला माँ
"इसको तो फ़र्क पड़ता है"
दूसरी मछली को उठाता और फिर बोलता
माँ "इसको तो फ़र्क पड़ता हैं" ! माँ ने बच्चे
को सीने से लगा लिया !
हो सके तो लोगों को हमेशा होंसला और
उम्मीद देनें की कोशिश करो, न जानें कब
आपकी वजह से किसी की जिन्दगी वदल
जाए!
क्योंकि आपको कोई फ़र्क नहीं पड़ता पर
"उसको तो फ़र्क पड़ता है"

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Re: Mini story
« Reply #8 on: August 23, 2016, 10:18:40 AM »
गुरबाणी केवल पढ़नी रटनी या पढ़ समझ कर अमल करनी है
ऐक पिता ने बच्चे को स्टोरी दी पड़ने को
बाद मे उस का टेस्ट लिया तो उसने सारी स्टोरी सुनादी बिना गलती के
बाप ने कहा वाह चल अब इसका मोरल बता क्या सीखा
बच्चा चुप क्युकी उसने तो स्टोरी रटी थी समझ के नही पढ़ी थी

बाप ने कहा अगर तुमने स्टोरी गलतिया करके सुनाई होती पर मोरल समझ जाते की कहानी से क्या सीख मिलती है तो मुझे ज्यादा खुशी होती

5 min मे जप जी साहिब 10 min मे जाप साहिब 30 minमे सुखमनी साहिब पढ़ को लोगे
पर जब तक गुरबाणी का मतलब ना समझा मोरल ना समझा ज़िन्दगी व्यर्थ चली जाऐगी ।

रोज़ पढ़ते है
"ददा दाता ऐक है सब के देवनहार"  फिर भी दर दर मांगते फिरते है
"सो क्यु मंदा आखिअै जित जमै राजान" फिर भी माँ बहन की गालिया देते है , बेटी होने पर अफसोस करते  है
"सतगुर सभना का भला मनाऐंदा तिस की बुरा क्यु होऐ" फिर भी कुछ गलत या दुख आने पर गुरू को अकाल पूरख को कोस्ते है
सिर्फ पढ़ने से विकारो से मुक्ती नही मिलनी क्युकी
"डिठै मुकत ना होवई जिचर शबद ना करे विचार"

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Re: Mini story
« Reply #9 on: August 23, 2016, 10:23:40 AM »
हमारे जीवन काल में केवल दो ही दिन ऐसे होते हैं, जो 24 घंटों के नहीं होते ?

पहला जिस दिन हम पैदा होते है
और दूसरा जिस दिन हम दुनिया छोड़  देते हैं ।
इसलिए जीवन का आनंद 24 घंटे उठाइये ।

 हँसते रहिये हंसाते रहिये
       सदा मुस्कुराते रहिये !!